चाईबासा में तेजस कार्यशाला: युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनाने पर जोर

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले में उद्यमिता, नवाचार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। जिला मुख्यालय चाईबासा स्थित सैफरन होटल में भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) और झारखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में जिला उद्योग केंद्र, चाईबासा की पहल पर स्टार्टअप इंडिया के अंतर्गत तेजस कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जिले के युवाओं और संभावित उद्यमियों को नवाचार आधारित विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन देना, स्थानीय संसाधनों एवं उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ना तथा रोजगार एवं आय के नए अवसर पैदा करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त मनीष कुमार, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम के बाद अतिथियों ने स्टार्टअप इंडिया के तहत तैयार स्थानीय उत्पादों और सामग्रियों के स्टॉल का निरीक्षण किया। इस दौरान उत्पादों की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया, नवाचार और बाजार की संभावनाओं की जानकारी ली गई।

स्थानीय संसाधनों में छिपी है उद्यमिता की बड़ी संभावना

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम में प्राकृतिक संसाधनों, पारंपरिक हुनर, स्थानीय उत्पादों और युवाओं की प्रतिभा के रूप में उद्यमिता की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। जरूरत इन संभावनाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और बेहतर बाजार से जोड़ने की है।

उन्होंने युवाओं से नौकरी की तलाश तक सीमित न रहने और अपने कौशल एवं स्थानीय संसाधनों के आधार पर उद्यम स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक छोटा विचार भी भविष्य में बड़े व्यवसाय का रूप ले सकता है और रोजगार मांगने वाले युवा रोजगार सृजक बन सकते हैं।

उपायुक्त ने मधु, हस्तशिल्प, कृषि एवं वनोपज आधारित उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण तथा पारंपरिक कला एवं शिल्प को बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग के जरिए बड़े बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया।

गांवों तक उद्यमिता पहुंचाने पर जोर

उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने कहा कि तेजस कार्यशाला का उद्देश्य उद्यमिता को केवल बड़े शहरों तक सीमित न रखते हुए गांवों और छोटे जिलों तक पहुंचाना है। जिले में कई युवा, किसान, महिला स्वयं सहायता समूह और छोटे व्यवसायी ऐसे हैं, जिनके पास बेहतर उत्पाद और नए विचार हैं, लेकिन उन्हें व्यवसायिक रूप देने के लिए मार्गदर्शन और बाजार की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग, तकनीकी जानकारी और डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से छोटे प्रयासों को टिकाऊ उद्यम में बदला जा सकता है।

विचार से बाजार तक दी गई जानकारी

कार्यशाला में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के प्रतिनिधियों ने स्टार्टअप शुरू करने की प्रक्रिया, स्टार्टअप मान्यता के लाभ, व्यवसाय मॉडल तैयार करने, नवाचार, बौद्धिक संपदा अधिकार, पेटेंट, डिजिटल मार्केटिंग और बाजार से जुड़ने की जानकारी दी।

प्रतिभागियों को बताया गया कि सफल व्यवसाय के लिए केवल नया विचार पर्याप्त नहीं है। बाजार की मांग, व्यवसाय की व्यवहार्यता, वित्तीय प्रबंधन, उत्पाद की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और ग्राहकों तक पहुंच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

ऋण और सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी

कार्यशाला में बैंक प्रतिनिधियों ने उद्यमियों के लिए उपलब्ध ऋण सुविधाओं और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी। मुद्रा ऋण सहित विभिन्न वित्तीय योजनाओं तथा झारखंड में उपलब्ध स्टार्टअप सहायता के बारे में प्रतिभागियों को बताया गया।

इसके साथ ही स्टार्टअप इंडिया की मान्यता, सरकारी योजनाओं से जुड़ने, बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण और नवाचार को सुरक्षित रखने के उपायों की भी जानकारी दी गई।

स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल

तेजस कार्यशाला में स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर रहा। मधु, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि एवं वनोपज आधारित उत्पादों सहित अन्य स्थानीय सामग्रियों को आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल माध्यमों के जरिए ग्राहकों तक पहुंचाने के तरीकों पर चर्चा की गई।

कार्यशाला में लगाए गए उत्पाद स्टॉल स्थानीय उद्यमिता की संभावनाओं की झलक पेश कर रहे थे। अतिथियों ने स्टॉल का निरीक्षण करते हुए उत्पादों की जानकारी ली और उन्हें बड़े बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की।

युवाओं और महिला समूहों को जोड़ने की पहल

कार्यशाला में विद्यार्थियों, औद्योगिक प्रशिक्षण एवं तकनीकी संस्थानों के छात्रों, महिला स्वयं सहायता समूहों, किसानों, छोटे व्यवसायियों, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों तथा नए व्यवसायिक विचार रखने वाले प्रतिभागियों को जोड़ा गया।

कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय समस्या को स्थानीय समाधान, स्थानीय संसाधन को स्थानीय व्यवसाय और स्थानीय प्रतिभा को रोजगार सृजन के अवसर में बदलने की दिशा में पहल की गई।

कार्यक्रम में प्रशिक्षु भारतीय प्रशासनिक सेवा पदाधिकारी सुश्री ईरा जोरवाल, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के प्रतिनिधि, जिला मत्स्य पदाधिकारी, अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक, विभिन्न चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि, झारखंड औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम की प्रतिनिधि, चाईबासा इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, बैंक प्रतिनिधि, उद्यमी, विद्यार्थी और अन्य प्रतिभागी मौजूद रहे।

तेजस कार्यशाला के जरिए पश्चिमी सिंहभूम में नवाचार को बढ़ावा देने, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इससे जिले में रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

AnupSrivastav
Author: AnupSrivastav

State Prabhari, Jharkhand Zee Bharat News

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