रिपोर्ट, सुरेंद्र सिंह चौहान
बाराबंकी। जनपद के थाना जैदपुर, ग्राम बीबीपुर के एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रतिभावान युवा डॉ. सुदेश कुमार पुत्र श्री रामकुमार वर्मा का चयन नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है। अपनी जड़ों से जुड़े रहकर और विपरीत परिस्थितियों के बीच अथक परिश्रम के बल पर डॉ. सुदेश ने देश के शीर्ष अकादमिक पटल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता की खबर मिलते ही पूरे गांव, शुभचिंतकों और बाराबंकी जनपद में हर्ष का माहौल है तथा उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
एक सामान्य कृषक परिवार में जन्मे डॉ. सुदेश के पिता गांव में रहकर पारंपरिक खेती-किसानी करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद डॉ. सुदेश की प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर से पूरी हुई, जहाँ से उन्होंने कड़े अनुशासन और संस्कारों को आत्मसात किया। इसके बाद उच्च शिक्षा के प्रति अपनी अटूट लगन के कारण उन्होंने देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) का रुख किया। वहां से उन्होंने हिंदी में एम.ए. करने के उपरांत भाषा प्रौद्योगिकी एवं भाषा विज्ञान जैसे आधुनिक और तकनीकी विषय में अपनी उच्च शोध उपाधियाँ (एम.फिल व पी-एच.डी.) पूर्ण कीं। उनकी यह शैक्षणिक यात्रा दर्शाती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो कोई भी बाधा लक्ष्य के आड़े नहीं आ सकती।
उल्लेखनीय है कि डॉ. सुदेश कुमार अपनी उत्कृष्ट विद्वता के लिए लगातार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयनित होने से पूर्व, अभी हाल ही में उन्हें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा कला और संस्कृति के क्षेत्र में उच्च स्तरीय शोध के लिए देश की सर्वोच्च अध्येतावृत्ति ‘टैगोर नेशनल फैलोशिप’ (Tagore National Fellowship for Cultural Research) से भी नवाजा गया था। पिछले माह मिली इस बड़ी राष्ट्रीय पहचान के बाद अब केंद्रीय विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में उनकी यह नई नियुक्ति उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ती है।
डॉ. सुदेश कुमार ने अपनी इस शानदार कामयाबी का श्रेय अपने पूज्य माता-पिता के आशीर्वाद, गुरुजनों के कुशल मार्गदर्शन और अपने अनवरत कठिन परिश्रम को दिया है। एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर इस प्रकार की गौरवशाली उपलब्धि हासिल करना न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे बाराबंकी और ग्रामीण अंचल के युवाओं के लिए एक महान प्रेरणा है। क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों ने इसे जनपद के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताया है।










