जब खदान की खुदाई से निकला शिवलिंग… तब जन्म हुआ जादूगोड़ा के ‘खदान बाबा’ की आस्था का

सौरभ कुमार, जादूगोड़ा

जादूगोड़ा की पहचान भले ही देश की यूरेनियम खदानों से होती हो, लेकिन इस औद्योगिक नगरी की एक ऐसी पहचान भी है, जिसके आगे हर कोई श्रद्धा से सिर झुका देता है। यह पहचान है जादूगोड़ा मोड़ चौक स्थित खदान बाबा शिव मंदिर की। यह कोई साधारण मंदिर नहीं, बल्कि एक ऐसी आस्था का केंद्र है, जिसकी शुरुआत किसी धार्मिक आयोजन से नहीं, बल्कि खदान क्षेत्र में हुई एक खुदाई से हुई थी। लगभग 50 वर्ष पहले यूसील के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट क्षेत्र में चल रही खुदाई के दौरान अचानक धरती की गोद से एक शिवलिंग प्रकट हुआ। उस समय मौजूद कर्मचारियों ने इसे महज संयोग नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ का दिव्य संकेत माना। पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ उस शिवलिंग को जादूगोड़ा मोड़ चौक स्थित पीपल के विशाल वृक्ष के नीचे स्थापित किया गया। किसी ने तब नहीं सोचा था कि यही स्थान आने वाले वर्षों में पूरे इलाके की सबसे बड़ी धार्मिक पहचान बन जाएगा। धीरे धीरे यहां पूजा शुरू हुई, लोगों की आस्था जुड़ती गई और फिर ऐसी मान्यताएं बनने लगीं कि खदान बाबा के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। किसी को नौकरी मिली, किसी का व्यापार चला, किसी के घर संतान सुख आया तो किसी की वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी हुई। लोगों ने इन घटनाओं को बाबा की कृपा माना, आज भी सुबह के व्यापारी, वाहन चालक और गृहिणियां हर कोई अपने दिन की शुरुआत बाबा के दर्शन से करता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि खदान बाबा का आशीर्वाद लेकर निकला व्यक्ति अपने कार्य में सफलता अवश्य प्राप्त करता है। यही विश्वास पिछले पांच दशकों से इस मंदिर को जीवंत बनाए हुए है। सावन का महीना आते ही खदान बाबा शिव मंदिर की रौनक देखते ही बनती है। पूरा परिसर “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से गूंज उठता है। जादूगोड़ा के अलावा पोटका, मुसाबनी, राखा, घाटशिला, आसनबनी और आसपास के कई गांवों से कांवरिए और श्रद्धालु जल लेकर यहां पहुंचते हैं। बेलपत्र, धतूरा, दूध, गंगाजल और पुष्प अर्पित कर भक्त अपने परिवार की सुख समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन की खुशहाली की कामना करते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष रुद्राभिषेक, महाआरती और शिव भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
समय के साथ मंदिर का स्वरूप भी बदलता गया। श्री श्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, पूरे परिसर में टाइल्स बिछाई गईं और इसे आकर्षक रूप दिया गया। सावन के दौरान स्थानीय व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु स्वयं आगे आकर मंदिर की सजावट और व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं। नियमित पूजा-अर्चना जादूगोड़ा के प्रसिद्ध पुजारी शक्ति पोदो मजूमदार विधि विधान से संपन्न कराते हैं। मंदिर परिसर में भगवान शिव के साथ बजरंगबली, शनिदेव, तारकेश्वर धाम शिव, मां तारा, मां दुर्गा तथा राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। श्रद्धालु एक ही स्थान पर अनेक देवी देवताओं के दर्शन कर अपने आपको धन्य मानते हैं। सावन के अंतिम सोमवार को यहां भव्य कीर्तन, महाआरती और महाभोग का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होकर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।खदानों की धरती पर जन्मी यह आस्था आज जादूगोड़ा की सबसे बड़ी धार्मिक पहचान बन चुकी है। जिस खुदाई का उद्देश्य धरती के भीतर छिपे खनिज को तलाशना था, उसी खुदाई से निकला शिवलिंग आज लाखों लोगों के विश्वास का सबसे अनमोल खजाना बन गया है। यही वजह है कि लोग कहते हैं जादूगोड़ा की खदानें देश को ऊर्जा देती हैं, लेकिन खदान बाबा का दरबार लोगों को आस्था, विश्वास और जीवन जीने की नई ऊर्जा देता है।

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