बाराबंकी: भू-माफिया और प्रशासन की मिलीभगत से गरीब की जमीन पर कब्जा, डिप्टी सीएम से गुहार


रिपोर्ट, सुरेंद्र सिंह चौहान जी भारत न्यूज़।
बाराबंकी: जनपद के तहसील फतेहपुर अंतर्गत ग्राम तिवारी पुरवा (मजरे लोहारपुर) से जालसाजी और अवैध कब्जे का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित रामेश्वर पुत्र प्रभू विश्वकर्मा ने उत्तर प्रदेश के माननीय उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि दबंगों ने न केवल उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है, बल्कि राजस्व प्रशासन के साथ मिलकर कागजों में भी फर्जीवाड़ा किया है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित रामेश्वर के अनुसार, उन्होंने 28 दिसंबर 2020 को गांव के ही सतीश यादव पुत्र राधेलाल से 24×20 फीट की आवासीय भूमि 7,250 रुपये में खरीदी थी। इस सौदे की बिक्री रसीद (स्टाम्प) पर गवाहों और क्रेता-विक्रेता के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।
विवाद तब शुरू हुआ जब सतीश यादव ने जमीन पर कब्जा देने से इनकार कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि सतीश यादव ने पुराने स्टाम्प पत्रों में हेराफेरी कर अपने भाई ‘पप्पू यादव’ का नाम अवैध रूप से जोड़ दिया है।
प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर आरोप
शिकायती पत्र में यह सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि तहसील प्रशासन की मिलीभगत से जमीन की ‘घरौनी’ गुपचुप तरीके से राधेलाल पुत्र हजारी के नाम दर्ज कर दी गई है। पीड़ित का कहना है:
राजस्व प्रशासन बिना जांच किए ही प्रार्थना पत्रों का फर्जी निस्तारण कर देता है।
चुनावी रंजिश के कारण ग्राम प्रधान द्वारा भी पीड़ित पर नाजायज दबाव बनाया जा रहा है।
तहसील स्तर पर कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
पीड़ित की मांग

रामेश्वर ने शासन से मांग की है कि:
दोषी राधेलाल और सतीश यादव के खिलाफ संवैधानिक जांच कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
स्टाम्प और सरकारी दस्तावेजों के साथ की गई छेड़छाड़ की उच्च स्तरीय जांच हो।
अवैध कब्जा हटवाकर पीड़ित का नाम ‘घरौनी’ में दर्ज किया जाए ताकि वह अपना आवास बना सके।
इस मामले में पीड़ित ने पूर्व में दी गई शिकायतों और बिक्री रसीद की छायाप्रति भी संलग्न की है। अब देखना यह है कि उपमुख्यमंत्री कार्यालय से आदेश जारी होने के बाद जिला प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।

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