जालौन: जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने आज संबंधित अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर जनपद में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जनपद में किसानों के लिए यूरिया, डीएपी एवं अन्य उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित एवं किसान हितैषी बनाए रखने की है। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान को खाद के लिए भटकना न पड़े और किसी भी स्तर पर कालाबाजारी अथवा अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक पैक्स एवं सहकारी समिति पर किसानों की सुविधा के अनुरूप अतिरिक्त मानव संसाधन की व्यवस्था की जाए तथा खतौनी का सत्यापन करने के बाद ही किसानों को उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उर्वरक की एक भी बोरी की कालाबाजारी न होने पाए तथा पूरे वितरण तंत्र की सतत निगरानी की जाए।बैठक में आईएफएमएस पोर्टल पर उपलब्ध स्टॉक का अवलोकन किया गया, जिसमें पाया गया कि जनपद की सभी सहकारी समितियों पर यूरिया तथा डीएपी का स्टॉक निरंतर बनाये रखने की आवश्यकता है क्योंकि वर्तमान समय में खरीफ फसलों की बुवाई एवं रोपाई का कार्य तेज गति से चल रहा है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने समस्त एसडीएम बीडीओ और जिला कृषि अधिकारी को निर्देश दिए कि प्रत्येक समिति पर न्यूनतम 22 से 25 मीट्रिक टन (500-550 बोरी) यूरिया तथा 15 से 18 मीट्रिक टन (300-360 बोरी) डीएपी हर समय उपलब्ध रहे। उन्होंने बताया कि पीसीएफ के बफर गोदामों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है, इसलिए संबंधित समितियों पर तत्काल अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए तथा किसानों की मांग के अनुरूप नियमित अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाए। समीक्षा बैठक के दौरान जिला कृषि अधिकारी द्वारा कालपी एवं आटा क्षेत्र के विभिन्न उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठानों के निरीक्षण एवं स्थलीय सत्यापन की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। निरीक्षण में कई प्रतिष्ठानों पर कतिपय अनियमितताएं सामने आईं। पीओएस मशीन में प्रदर्शित स्टॉक और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया गया, जिससे बिना पीओएस मशीन से प्रविष्टि किए उर्वरक बिक्री किए जाने की आशंका व्यक्त हुई। इसके अतिरिक्त कई प्रतिष्ठानों पर स्टॉक एवं विक्रय पंजिका अपूर्ण मिली, जबकि कहीं गत वर्ष की पंजिका ही संचालित पाई गई। निरीक्षण में कई दुकानों पर स्टॉक बोर्ड एवं निर्धारित मूल्य सूची भी प्रदर्शित नहीं मिली, जो उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए जिला कृषि अधिकारी ने 13 उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर साक्ष्यों सहित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं हुआ तो संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।जिलाधिकारी ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।इसमे कोई समस्या नहीं आने दी जा सकती है । कंट्रोल रूम से और फील्ड भ्रमण कर नियमित निगरानी की जाए ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो सके और किसानों को बुवाई में आसानी रहे । माह अगस्त और सितंबर के पीक सीज़न के कारण किसानों को उर्वरक की क़िल्लत नहीं होने दी जाएगी ।















