जमशेदपुर: नशा मुक्ति दिवस हर वर्ष पूरे देश में जागरूकता के उद्देश्य से मनाया जाता है। शासन-प्रशासन और मीडिया इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नशा मुक्ति अभियान केवल एक दिवस तक सीमित न रहकर पूरे वर्ष लगातार चलाया जाए, तो इसका असर समाज में कहीं अधिक प्रभावी दिखाई देगा।
जानकारों के अनुसार, वर्तमान समय में केवल जागरूकता अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनहित से जुड़े अभियानों को निरंतर और प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी है। यदि प्रशासन कानून के दायरे में रहते हुए निष्पक्ष कार्रवाई करे और समाज को भयमुक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास करे, तो सकारात्मक बदलाव संभव है।
कुछ वर्षों पहले तक लोग देर रात परिवार के साथ पार्कों और रेस्तरां में बेफिक्र समय बिताते थे। हालांकि वर्तमान में कुछ क्षेत्रों से नशे और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें सामने आती रही हैं। यह स्थिति हर स्थान पर समान नहीं है, लेकिन जहाँ ऐसी समस्याएँ मौजूद हैं, वहाँ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
कानून के तहत किसी भी कार्रवाई के लिए पर्याप्त साक्ष्य और शिकायत आवश्यक होती है। वहीं, कई नागरिक कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं। ऐसे में अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों का मनोबल बढ़ने की आशंका बनी रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रशासन, पुलिस, मीडिया और आम नागरिक आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, तो नशे के अवैध कारोबार, जुए-सट्टे और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। खोजी पत्रकारिता, नागरिकों से प्राप्त सूचनाएँ तथा कानून के अनुरूप की गई कार्रवाई इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही, निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
निष्कर्ष:
सुरक्षित, भयमुक्त और नशा मुक्त समाज का निर्माण केवल प्रशासन या पत्रकारों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जब प्रशासन, मीडिया और आम जनता मिलकर जिम्मेदारी निभाएंगे, तभी नशा और अपराध जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सकेगा









