अपने बगीचे की खुशबू से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा वर्मा दंपति

सौरभ कुमार

आज जब लोग बाजार की चकाचौंध और रासायनिक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में जमशेदपुर के बारीडी बस्ती निवासी 68 वर्षीय राजेंद्र कुमार वर्मा और उनकी पत्नी मीना वर्मा अपने छोटे से बगीचे से बड़ा संदेश दे रहे हैं “अपने लोकल के लिए वोकल बनिए, जो भी उगाइए उसका प्रचार-प्रसार करिए और प्रकृति से जुड़िए।”
इन दिनों वर्मा दंपति अपने क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं। आम का मौसम वर्तमान में चल रहा है। अपने हाथों से लगाए गए पौधों पर फलों को लदा देखकर दोनों के चेहरे पर जो संतोष और खुशी दिखाई देती है, वह शब्दों में बयां करना मुश्किल है। रिटायरमेंट के बाद जहां अधिकतर लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, वहीं यूसीएल से सेवानिवृत्त राजेंद्र कुमार वर्मा और उनकी धर्मपत्नी ने बागवानी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है। मिट्टी से जुड़ाव, पौधों की देखभाल और देसी जीवनशैली ने उनकी जिंदगी को नई ऊर्जा दी है। मीना वर्मा आम के अचार, मुरब्बा और आम से बनने वाली विभिन्न स्वादिष्ट रेसिपियों के लिए पूरे इलाके में जानी जाती हैं। हर साल वह आम का स्टॉक तैयार करती हैं, ताकि बरसात और सर्दियों के मौसम में भी घर में आम की मिठास बनी रहे। उनके हाथों से बने आम के अचार और मुरब्बे का स्वाद चखने वाले लोग उसकी तारीफ किए बिना नहीं रहते। इस वर्ष उनके बगीचे में लगे मल्लिका वैरायटी के आम विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन आमों का सुनहरा रंग, हल्की हरियाली और प्राकृतिक चमक उनकी ताजगी और गुणवत्ता को दर्शाती है। स्वाद में लाजवाब ये आम न केवल मिठास से भरपूर हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी हैं। इनमें विटामिन ए, सी और ई प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। वर्मा दंपति केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि पड़ोसियों और बच्चों के बीच भी आम बांटते हैं। उनके लिए आम का मौसम किसी त्योहार से कम नहीं होता। घर में अचार बनने की खुशबू, बच्चों की चहल-पहल और पेड़ों से आम तोड़ने की खुशी पूरे माहौल को उत्सव में बदल देती है। राजेंद्र वर्मा बताते हैं, “पेड़ लगाना और उन्हें फलते-फूलते देखना जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। यह सिर्फ शौक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण बचाने का संदेश है।” उनकी यह सोच समाज के लिए प्रेरणा है। आज जब पर्यावरण संकट और प्रदूषण गंभीर चुनौती बन चुके हैं, ऐसे में हर व्यक्ति को अपने घर-आंगन में पेड़-पौधे लगाने चाहिए। स्थानीय स्तर पर उगाए गए फल और सब्जियां न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती हैं। वर्मा दंपति यह साबित कर रहे हैं कि सादगी, मेहनत और प्रकृति से प्रेम के साथ जीवन जिया जाए तो हर मौसम त्योहार बन जाता है। उनका संदेश साफ है अपने लोकल को अपनाइए, पेड़ लगाइए, प्रकृति बचाइए और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली की सौगात छोड़ जाइए।

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