चाईबासा:झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की ओर से कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के सभागार में भव्य जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजन में जिले की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा, कला और विरासत की शानदार झलक देखने को मिली। कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी समाज के अधिकारों के प्रति जागरूकता, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्व एवं भूमि सुधार तथा परिवहन विभाग के मंत्री श्री दीपक बिरुवा शामिल हुए। विशिष्ट अतिथियों में मंझगांव विधायक निरल पूर्ति, मनोहरपुर विधायक जगत माझी, जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन एवं चाईबासा नगर परिषद अध्यक्ष नितिन प्रकाश मौजूद रहे। इसके अलावा जिले के विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।
पारंपरिक अंदाज में हुआ अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज से स्वागत के साथ हुई। इसके बाद अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का विधिवत शुभारंभ किया।
आयोजन के दौरान विभिन्न कलादलों के कलाकारों ने सांस्कृतिक नृत्य, छऊ नृत्य और नुक्कड़ नाटक की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए आदिवासी जीवनशैली, प्रकृति से जुड़ाव, परंपरा और सामाजिक सरोकारों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
शिक्षा और जागरूकता से होगा समाज का सशक्तिकरण : दीपक बिरुवा
मंत्री दीपक बिरुवा ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी आदिवासी संस्कृति, भाषा, परंपरा, कला और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली से है। आदिवासी महोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी पहचान, अधिकार और गौरव को समझने का अवसर भी है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के समग्र विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास और अधिकारों के प्रति जागरूकता को प्राथमिकता देना जरूरी है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं और विकास के अवसरों का लाभ मिल सके।
मंत्री ने कहा कि भूमि, जंगल और जल से जुड़ी आदिवासी समाज की परंपरागत आस्था एवं अधिकारों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से आगे बढ़ने तथा अपनी संस्कृति और परंपरा को साथ लेकर विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने और नशामुक्त एवं जागरूक समाज के निर्माण में सामूहिक भूमिका निभाने की अपील की।
अपने अधिकारों को जानना जरूरी : निरल पूर्ति
मंझगांव विधायक निरल पूर्ति ने कहा कि आदिवासी महोत्सव अपनी संस्कृति और परंपरा को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि समाज को मजबूत बनाने के लिए लोगों को अपने अधिकारों और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी होना जरूरी है।
उन्होंने शिक्षा एवं जागरूकता को समाज के सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए युवाओं को शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने पर जोर दिया।
संस्कृति के संरक्षण के साथ विकास में भागीदारी जरूरी : जगत माझी
मनोहरपुर विधायक जगत माझी ने कहा कि आदिवासी संस्कृति सदियों से प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती रही है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की भावना आदिवासी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रही है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान को बचाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ उन्हें अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
पांच कलाकार सम्मानित, छह लाभुकों को वनपट्टा
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जिले के पांच कलाकारों को सम्मानित किया गया। वहीं पांच मुण्डाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए तथा छह लाभुकों के बीच वनपट्टा का लाभ वितरित किया गया।
इस पहल के जरिए आदिवासी समाज के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है।
आदिवासी महोत्सव प्रचार वाहन को दिखाई हरी झंडी
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने झारखंड आदिवासी महोत्सव प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रचार वाहन के माध्यम से आदिवासी महोत्सव के उद्देश्यों, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण तथा सामाजिक जागरूकता का संदेश आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
इस अवसर पर अतिथियों ने पौधारोपण किया और सेल्फी स्टैंड का अनावरण किया। साथ ही हस्ताक्षर पट्टिका पर हस्ताक्षर कर आदिवासी संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की।
छऊ और पारंपरिक नृत्य रहे आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में प्रस्तुत छऊ नृत्य, पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य और नुक्कड़ नाटक दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत, पारंपरिक जीवनशैली और सामाजिक मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से सामने रखा।
झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 ने एक ओर जहां पश्चिमी सिंहभूम की विविधतापूर्ण आदिवासी संस्कृति को मंच प्रदान किया, वहीं दूसरी ओर अधिकारों के प्रति जागरूकता, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश भी दिया।














