जमशेदपुर:शहर के टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) ने नवजात शिशुओं के इलाज के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड (iNO) थेरेपी की शुरुआत की है। यह अत्याधुनिक उपचार पद्धति उन नवजात शिशुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, जो जन्म के बाद गंभीर श्वसन संबंधी समस्याओं और परसिस्टेंट पल्मोनरी हाइपरटेंशन ऑफ न्यूबॉर्न (PPHN) जैसी जानलेवा स्थिति से जूझते हैं।
इस नई सुविधा के शुरू होने के साथ ही अब गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को इलाज के लिए रांची, कोलकाता या अन्य बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी। इससे समय पर इलाज मिलने के साथ परिवारों को आर्थिक और मानसिक राहत भी मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, iNO थेरेपी फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को फैलाने में मदद करती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है और नवजात शिशु की स्थिति में तेजी से सुधार आने की संभावना बढ़ जाती है। यह तकनीक खासतौर पर उन शिशुओं के लिए उपयोगी है, जिनके फेफड़ों में जन्म के बाद सामान्य रक्त प्रवाह स्थापित नहीं हो पाता।
TMH में पहले से ही 35 बेड का अत्याधुनिक नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) संचालित है। अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि iNO थेरेपी शुरू होने से हर वर्ष लगभग 40 से 45 गंभीर नवजात शिशुओं को इसका लाभ मिलेगा।
अस्पताल के अनुसार, TMH जमशेदपुर का पहला और झारखंड का दूसरा अस्पताल बन गया है, जहां यह जीवनरक्षक तकनीक उपलब्ध कराई जा रही है। इस पहल से क्षेत्र में नवजात शिशुओं के गंभीर उपचार की सुविधाएं और अधिक मजबूत होंगी तथा शिशु मृत्यु दर कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।









