चाईबासा: उपायुक्त” पश्चिमी सिंहभूम, मनीष कुमार द्वारा कृषि प्रौद्योगिकी अभिकरण-चाईबासा का किया निरीक्षण,दिए कई आवश्यक दिशा निर्देश

चाईबासा से अनूप श्रीवास्तव की रिपोर्ट जी भारत न्यूज़

पश्चिमी सिंहभूम जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार के द्वारा चाईबासा प्रखंड क्षेत्र भ्रमण के क्रम में मतकमहातु पंचायत के कमारहातु स्थित बंद खादान में केजकल्चर के माध्यम से किये जा रहे मछली पालन कार्यों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्थानीय पंचायत की मुखिया एवं लाभुक समिति के सदस्य उपस्थित रहे। मछली पालन कार्य से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के दौरान उपायुक्त को अवगत करवाया गया कि मत्स्य लाभुक समिति में कुल 52 परिवार से एक-एक सदस्य शामिल हैं तथा इससे लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इस क्रम में उपायुक्त के द्वारा लाभुक समिति से मछली उत्पादन व बिक्री एवं कार्यालय से उपलब्ध सहायता संबंधित जानकारी तथा मछली पालन को वृहद स्तर पर करने से संबंधित आवश्यकताओं से संबंधित जानकारी भी प्राप्त की गई।

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त के द्वारा कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण- चाईबासा कार्यालय का अवलोकन के क्रम में समस्त परिसर का जायजा लिया गया। इस दौरान उपायुक्त के द्वारा परियोजना निदेशक- आत्मा से कार्यालय के माध्यम से संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों से संबंधित अद्यतन जानकारी, साथ ही कार्यालय के द्वारा किसानों को प्रदत्त सेवाएं व प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कृषि यंत्र व बीज वितरण, कार्यालय में संधारित विभिन्न पंजी आदि के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई। इस क्रम में उपायुक्त के द्वारा परियोजना निदेशक आत्मा को जेएसएलपीएस डीपीएम के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जिले के अधिक से अधिक महिला किसानों को प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ने का निर्देश दिया गया, ताकि कृषि एवं अन्य कृषि आधारित कार्यों में संलग्न महिला किसान प्रशिक्षित होकर कृषि कार्य को बेहतर तरीक़े से करते हुए आत्मनिर्भर बन सकें।

निरीक्षण के अगले चरण में उपायुक्त के द्वारा मतकमहातु पंचायत स्थित स्वास्थ्य उप केंद्र-सह-वैलनेस सेंटर का अवलोकन किया गया। इस दौरान केंद्र के द्वारा स्थानीय वासियों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाएं, प्रतिनियुक्त कर्मियों, उपस्थिति पंजी, केंद्र पर उपलब्ध दवाइयां एवं अन्य व्यवस्थाओं का क्रमशः जायजा लिया गया। साथ ही निर्देश दिया गया कि केंद्र के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं एवं व्यवस्थाओं के संचालन में किसी प्रकार की कोताही ना हो, स्थानीय ग्रामीण जनों को केंद्र की उपलब्धता का भरपूर लाभ मिले, यह सुनिश्चित किया जाए।

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