8 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिली जीत, ग्रेच्युटी भुगतान प्राप्त कर ललित किशोर बने कर्मचारियों के लिए मिसाल

राकेश सिंह, ब्लॉक रिपोर्टर

जमशेदपुर। निजी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उदाहरण सामने आया है। जमशेदपुर निवासी ललित किशोर ने अपनी ग्रेच्युटी (उपादान) राशि प्राप्त करने के लिए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ लगभग आठ वर्षों तक कानूनी संघर्ष किया और अंततः सफलता हासिल की। उनकी यह जीत अब उन कर्मचारियों के लिए प्रेरणा बन रही है जो निजी संस्थानों में शोषण अथवा अधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठाने से हिचकिचाते हैं।
5 जून 2026 को उप श्रमायुक्त, जमशेदपुर अरविंद कुमार के हाथों ललित किशोर को ग्रेच्युटी भुगतान का चेक सौंपा गया। यह चेक केवल आर्थिक भुगतान नहीं, बल्कि आठ वर्षों तक चले संघर्ष, धैर्य और न्याय की जीत का प्रतीक माना जा रहा है।
ललित किशोर ने बताया कि ग्रेच्युटी भुगतान का आदेश लगभग छह वर्षों की कानूनी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2024 में ही प्राप्त हो गया था। इसके बावजूद श्री कृष्णा पब्लिक स्कूल, बिष्टुपुर प्रबंधन द्वारा भुगतान में लगातार टालमटोल की जा रही थी। इसके बाद उन्हें राशि प्राप्त करने के लिए एक अलग रिकवरी केस दायर करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि उप श्रमायुक्त अरविंद कुमार के सहयोग और कानूनी प्रक्रिया के तहत किए गए प्रयासों के फलस्वरूप अंततः स्कूल प्रबंधन से ग्रेच्युटी राशि की वसूली संभव हो सकी। इस पूरे संघर्ष में उनके अधिवक्ता प्रणव कुमार चटर्जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कानूनी लड़ाई को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया।
ललित किशोर ने उप श्रमायुक्त अरविंद कुमार, अधिवक्ता प्रणव कुमार चटर्जी तथा उन सभी मित्रों और साथी कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने संघर्ष के दौरान उनका मनोबल बढ़ाया और हर कदम पर उनका साथ दिया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि उनका यह मामला उन कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा जो अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हैं या कार्यस्थल पर शोषण का सामना कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि कर्मचारी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और कानूनी प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखें, तो न्याय अवश्य प्राप्त किया जा सकता है।

Leave a Comment