खुले आसमान के नीचे रोती मिली नवजात बच्ची, मां छोड़ गई अकेला | दिल दहला देने वाली कहानी

सौरभ कुमार, जादूगोड़ा

पोटका प्रखंड के डोमजुड़ी पंचायत अंतर्गत धोबनी गांव की वह सुबह शायद गांव वाले कभी नहीं भूल पाएंगे। चारों ओर सन्नाटा था। उस सन्नाटे को चीरती हुई एक मासूम की रुलाई सुनाई दी। वह कोई सामान्य रोने की आवाज नहीं थी। वह आवाज जैसे किसी ऐसे दिल की थी, जिसे दुनिया में आते ही अपनों ने ठुकरा दिया हो। सुबह करीब साढ़े पांच बजे गांव की 14 वर्षीय दुला हांसदा अपने घर के आसपास झाड़ू लगा रही थी। अचानक उसे एक नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। वह आवाज की दिशा में बढ़ी तो उसकी आंखें फटी रह गईं। खुले आसमान के नीचे, धरती पर पड़ी एक नन्हीं सी बच्ची लगातार रो रही थी। उसकी आंखें शायद किसी को खोज रही थीं।

शायद वह अपनी मां को ढूंढ रही थी। शायद उसे उम्मीद थी कि अभी कोई आएगा, उसे गोद में उठाएगा, सीने से लगाएगा। लेकिन वहां कोई नहीं था। जिस मां की धड़कनें नौ महीने तक उसके साथ थीं, जिसने उसे अपनी कोख में पाला, वही उसे इस निर्दयी दुनिया के बीच अकेला छोड़कर चली गई थी। मासूम की रुलाई सुनकर गांव के लोग दौड़ पड़े। देखते ही देखते वहां भीड़ जुट गई। कई महिलाओं की आंखें भर आईं। किसी ने उसे गोद में उठाया, किसी ने उसके शरीर को कपड़े से ढंका, तो कोई उसकी मासूम सूरत देखकर अपने आंसू नहीं रोक पाया। गांव की बुजुर्ग महिलाओं का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में बहुत कुछ देखा है, लेकिन जन्म लेते ही किसी बच्चे को इस तरह बेसहारा छोड़ देने की घटना ने उनका कलेजा हिला दिया। सूचना मिलते ही जादूगोड़ा पुलिस, डोमजुड़ी पंचायत की मुखिया अनीता मुर्मू, जिला परिषद सदस्य हिरण्यमय दास, स्वास्थ्य सहिया लक्ष्मी सोरेन, वार्ड सदस्य राहुल सोरेन समेत कई लोग मौके पर पहुंचे। बच्ची को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक जांच के बाद उसे एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया। बाद में उसे चाइल्ड हेल्पलाइन के संरक्षण में सौंप दिया गया। लेकिन पूरे घटनाक्रम के बीच एक सवाल हर किसी को बेचैन करता रहा क्या उस मां का दिल एक बार भी नहीं पसीजा होगा? क्या उसने एक बार भी पलटकर अपनी बच्ची को नहीं देखा होगा? क्या उसे उस मासूम की रुलाई सुनाई नहीं दी होगी? गांव के लोगों का कहना है कि बच्ची भले ही जन्म देने वाली मां से दूर हो गई हो, लेकिन अब पूरा गांव उसके साथ खड़ा है। कई लोग उसे अपनाने और उसका भविष्य संवारने की इच्छा जता रहे हैं।

वार्ड सदस्य राहुल सोरेन की पत्नी माधो सोरेन ने बच्ची को गोद लेने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा, “भगवान ने हमें बेटी नहीं दी। यदि कानून अनुमति देगा तो हम इस बच्ची को अपनी बेटी बनाकर उसका पालन-पोषण करेंगे। उसे कभी यह महसूस नहीं होने देंगे कि वह लावारिस थी।” धोबनी गांव की उस सुबह ने एक दर्दनाक कहानी लिख दी। एक तरफ वह मां थी, जिसने अपनी कोख के टुकड़े को छोड़ दिया। दूसरी तरफ वे अनजान लोग थे, जिनका बच्ची से कोई रिश्ता नहीं था, फिर भी उसकी एक-एक सिसकी पर उनकी आंखें नम हो गईं। उस मासूम की रुलाई अब थम चुकी है, लेकिन उसके रोने की गूंज आज भी धोबनी गांव की हवा में महसूस की जा सकती है। शायद वह गूंज समाज से एक ही सवाल पूछ रही है

“मुझे जन्म तो दिया, लेकिन आखिर मेरा कसूर क्या था?”

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