ब्यूरो रिपोर्ट: शोभित पाण्डेय
कालपी (जालौन)
वर्तमान पत्रकारिता का एक चुनौतीपूर्ण समय है। गलत लोगों तथा माफियाओं का गठजोड़ वर्तमान समय में निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए चुनौती पूर्ण समय है। पत्रकारिता का व्यवसायीकरण हो जाने के कारण कलम की धार में ग्रहण लग रहा है। इसमें सुधार की बहुत आवश्यकता है।यह उदगार पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने व्यक्त किए।

शनिवार को डिस्ट्रिक्ट प्रेस क्लब कालपी के तत्वावधान में राजा पैलेस कालपी में हिन्दी पत्रकारिता दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में में मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे डा शुक्ला ने अपने सम्बोधन में कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता को निष्पक्ष बनाये रखने के लिये सभी पत्रकार अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वाह करने में अग्रणी भूमिका निभाये। कालपी महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या डॉ सुधा गुप्ता ने अपने सम्बोधन में हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारिता का योगदान 1857 से 1947 तक पत्रकारिता आज़ादी की लड़ाई का सबसे बड़ा हथियार बनी थी।

उन्होंने ने बताया चेतना जगाने वाले पत्र राजा राममोहन राय का मिरात-उल-अखबार भारतेन्दु हरिश्चंद्र का कविवचन सुधा बाल गंगाधर तिलक का केसरी महात्मा गांधी का यंग इंडिया व नवजीवन ने जनता को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा करने में महात्व पूर्ण भूमिका निभाई थी। हिन्दी पत्रकारिता दिवस कार्यक्रम को जय खत्री, रवीन्द्र नाथ गुप्ता, शरद खन्ना, देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, कल्लू सिंह यादव, भारत सिंह यादव, पूर्व चेयरमैन कमर अहमद द्वारा भी हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर प्रकाश डाला गया । उपजिलाधिकारी अमित शेखर नं राष्ट्र भाषा तथा राज्य भाषा पर प्रकाश डालते हुए अवगत कराया है कि राष्ट्र भाषा हिंदी का हर जगह प्रयोग करें। इससे सदभावना कायम होती है। एसडीएम ने हिंदी पत्रकारिता के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारिता के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा क्रांतिकारियों की आवाज गणेश शंकर विद्यार्थी का प्रताप माखनलाल चतुर्वेदी का कर्मवीर प्रभा और प्रताप ने क्रांतिकारियों के विचार घर-घर पहुंचाए। विद्यार्थी जी ने 1921 के रायबरेली किसान आंदोलन की रिपोर्टिंग कर जेल तक गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक नरेन्द्र पाल सिंह जादौन ने अपने अध्यक्षीय भाषण में बताया स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक पत्रकारिता के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता है। कलम के माध्यम से भारतीय जनमानस में स्वतन्त्रता की अग्नि को प्रज्वलित करने में पत्रकारिता का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने बताया कि उदन्त मार्तण्ड से शुरू हुआ सफर हिंदुस्तान, आज,भारत मित्र, दैनिक जागरण तक पहुंचा। अंग्रेजों ने प्रेस एक्ट 1910, वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट 1878 से आवाज दबाई, पर कलम नहीं रुकी। कई संपादक जेल गए, प्रेस जब्त हुए, पर अखबार निकलते रहे।

उन्होंने बताया आपातकाल 1975-77 में पत्रकारिता का संघर्ष 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगा। यह हिंदी पत्रकारिता के लिए सबसे कठिन दौर था। मीसाबंदी का जश्न झेलने वाले पूर्व विधायक ने कहा सेंसरशिप का दौर प्रेस पर सेंसर लगा दिया गया। खबर छापने से पहले सरकारी अफसर से पास करानी पड़ती थी। दिल्ली में सूचना भवन से हर रोज निर्देश आते थे कि क्या छापना है क्या नहीं। सरकार के इस क़दम का विरोध की मशाल इंडियन एक्सप्रेस के रामनाथ गोयनका ने खाली संपादकीय छापकर विरोध किया। जनसत्ता के प्रभाष जोशी दिनमान के रघुवीर सहाय रविवार के एस.पी. सिंह ने जोखिम लेकर सच लिखा। उन्होंने बताया भूमिगत पत्र कई पत्रकारों ने साइक्लोस्टाइल मशीन से गुप्त पर्चे निकाले। कुलदीप नैयर की किताब इमरजेंसी रीटोल्ड और एल.के. आडवाणी का वह कथन आपने झुकने को कहा तो ये रेंगने लगे इसी दौर की गवाही हैं।

हिंदी पत्रों की भूमिका ‘दिनमान, साप्ताहिक, हिंदुस्तान धर्मयुग ने व्यंग्य कविता कहानी के जरिए जनता तक सच पहुंचाया। कई छोटे अखबार बंद कर दिए गए पत्रकारों को मीसा में जेल भेजा गया। आज की प्रासंगिकता हिंदी पत्रकारिता दिवस सिर्फ उदन्त मार्तण्ड को याद करने का दिन नहीं है। यह उन लाखों शब्द-सिपाहियों को नमन का दिन है जिन्होंने आज़ादी के लिए और लोकतंत्र बचाने के लिए कलम को तलवार बनाया। आपातकाल ने सिखाया कि जब सत्ता सवाल से डरती है तब पत्रकारिता का धर्म सबसे बड़ा हो जाता है। उन्होंने कहा आज डिजिटल युग में चुनौतियां नई हैं पर जिम्मेदारी वही पुरानी है सच बोलना, डटे रहना। क्योंकि लोकतंत्र में अखबार सिर्फ खबर नहीं छापते जनता की आवाज बनते हैं। कार्यक्रम का शुभारम्भ पूर्व पुलिस महानिदेशक सूर्य कुमार शुक्ला द्वारा सरस्वती प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण से किया गया।

संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा आते हुए अतिथियों को अंगवस्त्र भेंट तथा माल्यार्पण से किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश गुप्ता, रामकुमार तिवारी, देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, अपूर्व शरद श्रीवास्तव, रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव, पुरुषोत्तम यज्ञिक कुंवरपुर,रवीन्द्र कुमार पुरवार, वरिष्ठ पत्रकार सत्यप्रकाश विश्नोई, महेन्द्र कुमार गौतम, राजीव पुरवार, अशोक पुरवार, शिक्षक नरेन्द्र सिंह यादव, सभासद राकेश यादव, राजयोगिनी रजनी पाल,रवीन्द्र कुमार वर्मा, श्रीमती ज्योति विश्वकर्मा, राजकुमार गुप्ता ( राजू पतारा), ब्राह्मण समाज के नगर अध्यक्ष सज्जन त्रिपाठी, राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ हर्षेन्द्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक उदयप्रताप सिंह यादव, रविंद्र कोरी, राकेश यादव,सहित वरिष्ठ पत्रकार, अधिवक्ता, व्यापारी, समाजसेवी एवं समाजसेवी संगठनों के प्रमुख उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन हरमोहन सिंह यादव द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में संगठन के संरक्षक शरद खन्ना, तहसील अध्यक्ष सलीम अंसारी, नगर अध्यक्ष राज नारायण शुक्ला, महामंत्री अमित यादव, अरविंद राठौर, राजाबाबू ओमरे, पवन गुप्ता, अंकित गुप्ता, विकास सिंह, शोभित पांडे, फहीम खान, श्यामू पाल, कैफ रजा, पंकज ठाकुर, मुस्ताक अंसारी, अमीर हसन अंसारी, अजीम उल्ला, वीरेंद्र वर्मा, रहमत खान, देव पटेल, राजकुमार चौरसिया, संतोष राठौर, भूपेंद्र विश्वकर्मा, रविंद्र सिंह, आदि पत्रकारों एवं बुद्धिजीवियों ने सहभागिता की। तथा अतिथियों को शाल ओढ़ाकर तथा माला पहनाकर सम्मानित किया।










