जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों में आज भी स्वच्छ पेयजल लोगों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। एक ओर शहर में आधुनिक जलापूर्ति व्यवस्था के तहत घर-घर तक नियमित रूप से साफ पानी पहुंचाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहने को मजबूर है। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब महिलाओं और बच्चों को घंटों धूप में खड़े होकर पानी भरने का इंतजार करना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार, शहर में जलापूर्ति की व्यवस्था जुस्को द्वारा संचालित की जाती है, जहां निर्धारित शुल्क के बदले शहरी क्षेत्रों में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन विडंबना यह है कि जिन ग्रामीण इलाकों की नदियों, तालाबों और जलाशयों से पानी लेकर उसे शुद्ध कर शहर तक पहुंचाया जाता है, वहीं उन गांवों के लोग आज भी मूलभूत पेयजल सुविधा से वंचित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। अविभाजित बिहार के समय से लेकर अलग राज्य बनने के बाद तक हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। झारखंड राज्य का गठन जल, जंगल और जमीन के मुद्दों को लेकर हुआ था, लेकिन आज भी राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों को पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
सुबह पुरुष रोजी-रोटी की तलाश में घर से निकल जाते हैं, जबकि घरों में पानी लाने की जिम्मेदारी महिलाओं और बच्चों के कंधों पर आ जाती है। कई गांवों में टैंकर आने के समय लंबी कतारें लग जाती हैं और लोगों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि उन्हें टैंकरों के भरोसे जीवन यापन न करना पड़े।
रिपोर्ट : राकेश सिंह, प्रखंड संवाददाता, जी भारत न्यूज़।









