रिपोर्ट, सुरेंद्र सिंह चौहान।
बाराबंकी, 2 जून 2026। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु में खाद्य जनित और संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए मई माह में जनपद बाराबंकी में विशेष अभियान चलाया। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश तथा जिलाधिकारी बाराबंकी के निर्देश पर 1 मई से 31 मई 2026 तक संचालित इस अभियान के दौरान कृत्रिम रूप से फलों को पकाने वाले प्रतिबंधित रिपेनिंग एजेंट्स के उपयोग पर विशेष निगरानी रखी गई।

अभियान के तहत विभागीय टीमों ने जनपद में 45 निरीक्षण और 7 छापेमारी कार्रवाइयाँ कीं। इस दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों से आइसक्रीम, आइसकैंडी एवं कैफिनेटेड बेवरेज के नमूने गुणवत्ता परीक्षण हेतु संग्रहित किए गए। जिन प्रतिष्ठानों से नमूने लिए गए उनमें अब्दुलापुर, जैदपुर, सुमेरगंज, हैदरगढ़, टिकैतनगर, मुबारकपुर तथा पल्हरी चौराहा स्थित प्रतिष्ठान शामिल हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में खराब एवं संक्रमित खाद्य सामग्री भी नष्ट कराई। विभाग के अनुसार लगभग 30 किलोग्राम खरबूजे, 10 किलोग्राम सेब, 25 दर्जन केले, 10 किलोग्राम पपीता तथा करीब 15 लीटर रंगीन आइसकैंडी घोल को नष्ट कराया गया। इन खाद्य पदार्थों का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 5,650 रुपये बताया गया है।

अधिकारियों ने आम लोगों को जागरूक करते हुए अपील की कि वे गर्मी के मौसम में सड़े-गले, कटे-फटे फलों, रंगीन आइसकैंडी तथा खुले में बिकने वाली खाद्य सामग्री के सेवन से बचें, ताकि संक्रामक रोगों के खतरे को कम किया जा सके।
विभागीय टीम ने फल एवं सब्जी मंडियों का भी निरीक्षण किया और व्यापारियों व आढ़तियों को चेतावनी दी कि वे प्रतिबंधित रसायनों से कृत्रिम रूप से पकाए गए फलों अथवा रंगी हुई सब्जियों का कारोबार न करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा संबंधित विनियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सहायक आयुक्त खाद्य (द्वितीय) डा. शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु नियमित निरीक्षण एवं कार्रवाई की जाती रहेगी।
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