रिपोर्ट, सुरेंद्र सिंह चौहान।
सरल एवं सहज हिंदी के माध्यम से आमजन तक न्याय और विधिक अधिकारों की जानकारी पहुंचाने पर जोर
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार तथा जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाराबंकी श्रीमती प्रतिमा श्रीवास्तव के निर्देशन में हिंदी दिवस के अवसर पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का आयोजन टीआरसी लॉ कॉलेज, सतरिख, बाराबंकी में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाराबंकी के सचिव श्री उज्ज्वल उपाध्याय ने की। इस दौरान उन्होंने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा, संवेदनाओं और सामाजिक एकता का सशक्त माध्यम है। हिंदी ने देश के विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों के लोगों को आपस में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि हिंदी आज भारत की सीमाओं से निकलकर विश्व के अनेक देशों में अपनी पहचान स्थापित कर रही है। न्याय के क्षेत्र में भाषा का विशेष महत्व है। न्याय तभी सार्थक माना जा सकता है, जब वह आम नागरिक को आसानी से समझ में आए और प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों से परिचित हो।
श्री उज्ज्वल उपाध्याय ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रमुख उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर गरीब, कमजोर एवं वंचित व्यक्तियों तक न्याय और विधिक सहायता पहुंचाना है। इस कार्य में सरल और सहज हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे आमजन कानूनी प्रावधानों और अपने अधिकारों को आसानी से समझ सकें।
कार्यक्रम के दौरान विधिक जागरूकता के साथ-साथ हिंदी भाषा के महत्व पर भी चर्चा की गई। उपस्थित विधि छात्रों को न्यायिक एवं विधिक कार्यों में सरल भाषा के प्रभावी उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर टीआरसी लॉ कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अश्विनी गुप्ता सहित अध्यापकगण डॉ. नवीन सिंह, डॉ. वीर विक्रम सिंह, डॉ. रत्ना वर्मा, डॉ. अमजद अंसारी तथा विधि छात्र उपस्थित रहे।
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