मलेरिया नियंत्रण को लेकर एक्शन मोड में पश्चिमी सिंहभूम प्रशासन, उपायुक्त मनीष कुमार ने दिए सख्त निर्देश

पश्चिमी सिंहभूम जिले में मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन ने अभियान तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। उपायुक्त मनीष कुमार ने कीटनाशी छिड़काव कार्य में तेजी लाने, शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने और छूटे हुए घरों में दोबारा छिड़काव कराने के निर्देश दिए हैं। शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को आयोजित वर्चुअल बैठक में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीमों और छिड़काव कर्मियों से अभियान की प्रगति तथा जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं की जानकारी ली।

उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि मलेरिया नियंत्रण अभियान में केवल लक्ष्य पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि छिड़काव की गुणवत्ता और प्रत्येक लक्षित घर तक पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की वेक्टर जनित रोग नियंत्रण टीमों को निर्देश दिया कि मलेरिया प्रभावित गांवों, संवेदनशील बस्तियों और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष सतर्कता के साथ काम किया जाए। किसी भी गांव, टोले या घर को अभियान से वंचित नहीं रखा जाए।

बंद घरों में दोबारा होगा छिड़काव

उपायुक्त ने छिड़काव के दौरान बंद मिले घरों, घर में किसी सदस्य के मौजूद नहीं रहने के कारण छूटे घरों और छिड़काव से इनकार करने वाले परिवारों की अलग-अलग सूची तैयार करने का निर्देश दिया। ऐसे घरों में दोबारा संपर्क स्थापित कर छिड़काव का कार्य पूरा कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन परिवारों को कीटनाशी छिड़काव के महत्व की जानकारी नहीं है, उन्हें मलेरिया से बचाव और इसके स्वास्थ्य संबंधी लाभों के बारे में समझाया जाए। इस कार्य में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सहिया, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य सामुदायिक सहयोगियों की मदद लेने पर भी जोर दिया गया।

दुर्गम गांवों तक पहुंचेगा विशेष अभियान

जिले के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में मलेरिया नियंत्रण अभियान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। उपायुक्त ने कहा कि भौगोलिक कठिनाइयों और आवागमन की समस्याओं के कारण किसी भी गांव में छिड़काव का काम बाधित नहीं होना चाहिए। इसके लिए क्षेत्रवार कार्ययोजना तैयार करने, कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और अभियान की नियमित समीक्षा करने को कहा गया।

इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बने नाडेप, पशु शेड और उन अन्य स्थानों पर भी छिड़काव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, जहां मच्छरों के पनपने की आशंका रहती है।

स्थानीय भाषा में जागरूकता, रात्रि चौपाल पर जोर

मलेरिया के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए प्रशासन गांवों में रात्रि चौपाल, सामुदायिक बैठक और घर-घर संपर्क अभियान चलाने पर जोर दे रहा है। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि ग्रामीणों को स्थानीय भाषा में मलेरिया के लक्षण, संक्रमण के कारण, बचाव के उपाय और समय पर जांच एवं उपचार की जानकारी दी जाए।

उन्होंने ग्रामीणों से घरों में कीटनाशी छिड़काव कराने की अपील करने और बुखार होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में मलेरिया की जांच कराने के लिए प्रेरित करने को कहा। बीमारी की पुष्टि होने पर स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के अनुसार पूरा उपचार लेना भी जरूरी बताया गया।

कागजी रिपोर्ट नहीं, जमीन पर काम का होगा सत्यापन

उपायुक्त मनीष कुमार ने छिड़काव अभियान की गुणवत्ता और वास्तविक प्रगति की जांच के लिए नियमित निरीक्षण का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर अभियान की सफलता का आकलन नहीं किया जाना चाहिए। अधिकारियों को क्षेत्र में पहुंचकर छिड़काव की गुणवत्ता, निर्धारित प्रक्रिया के पालन और वास्तविक कवरेज का सत्यापन करना होगा।

जहां भी कमी पाई जाएगी, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए छूटे हुए घरों को अभियान में शामिल किया जाएगा। सभी संबंधित स्वास्थ्य टीमों को छिड़काव की अद्यतन स्थिति की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया।

सामूहिक प्रयास से मलेरिया पर नियंत्रण का लक्ष्य

उपायुक्त ने कहा कि मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। कीटनाशी छिड़काव, समय पर जांच, उचित उपचार और लगातार जन-जागरूकता के माध्यम से संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है।

जिला प्रशासन का उद्देश्य मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में अभियान को अधिक प्रभावी बनाना और प्रत्येक लक्षित गांव एवं घर तक स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ पहुंचाना है।

AnupSrivastav
Author: AnupSrivastav

State Prabhari, Jharkhand Zee Bharat News

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