रिपोर्ट,पी.एन. सिंह
बेलहरा। कस्बे के श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर, फतेहपुर के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर तथा महावीर चैत्यालय में पर्युषण पर्व के अंतर्गत चल रहे दसलक्षण धर्म के दूसरे दिन गुरुवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ उत्तम मार्दव धर्म मनाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना कर अहंकार का त्याग और विनम्रता का जीवन में महत्व समझा।
प्रातःकाल मंदिरों में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भगवान का जलाभिषेक, पूजन आदि धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान की आराधना कर सुख-शांति एवं मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा।
सायंकाल मंदिर में भव्य मंगल आरती का आयोजन किया गया। इसके बाद प्रवचन और चालीसा पाठ हुआ। प्रवचन के दौरान ब्रह्मचारिणी पूजा दीदी ने उत्तम मार्दव धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मार्दव धर्म मनुष्य के भीतर उत्पन्न होने वाले मान और अहंकार रूपी शत्रु का नाश करने की प्रेरणा देता है। मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। संसार में किसी का भी अहंकार स्थायी नहीं रहा है।
उन्होंने कहा कि बलशाली रावण को भी अपने सामर्थ्य और वैभव का अहंकार था, लेकिन अंततः उसका भी अहंकार समाप्त हो गया। इसी प्रकार देवलोक के राजा इंद्रदेव को जब अपने सामर्थ्य का अहंकार हुआ तो रावण ने उन्हें पराजित कर उनके अहंकार को दूर किया। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन में पद, धन, बल और प्रतिष्ठा का अभिमान न करते हुए सदैव विनम्रता का भाव रखना चाहिए।
पूजा दीदी ने कहा कि मार्दव धर्म मनुष्य को स्वयं को बड़ा समझने के बजाय सभी के प्रति समानता और विनम्रता का व्यवहार करने की सीख देता है। अहंकार व्यक्ति को धर्म और सदाचार के मार्ग से दूर करता है, जबकि विनम्रता मनुष्य के व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बनाती है। दसलक्षण पर्व आत्मशुद्धि, संयम और जीवन में सद्गुणों को अपनाने का अवसर प्रदान करता है।
इस अवसर पर जैन यूनिटी ग्रुप की ओर से आरती प्रतियोगिता समेत विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रतियोगिता में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मंदिरों में हुए धार्मिक आयोजनों में जैन समाज के महिला-पुरुष, बच्चे और युवाओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भगवान के जयकारों से गूंजता रहा।इस शुभ अवसर जैन समाज की काफी संख्या में महिलाएं पुरुष मौजूद रहे
















