पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड अंतर्गत पड़सा पंचायत में सक्रिय एवं इच्छुक महिला राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को चुनाव प्रबंधन, चुनावी अभियान की रणनीति, जनसंपर्क और राजनीतिक नेतृत्व के विभिन्न पहलुओं की व्यावहारिक जानकारी देना था।
कार्यशाला का आयोजन सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनीतिक नेतृत्व से जुड़े हरिन तामसोय ने FORE School of Management के FORE Centre for Political Leadership and Governance के सहयोग से किया। इसमें दिल्ली से पहुंचीं चुनाव प्रबंधन एवं चुनावी अभियान विशेषज्ञ पौसाली तथा FORE Centre for Political Leadership and Governance की ओर से निशा एक्का ने प्रतिभागी महिलाओं को प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला में मझगांव प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से करीब 25 सक्रिय राजनीतिक महिलाओं ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को चुनाव लड़ने की तैयारी से लेकर चुनावी अभियान को प्रभावी तरीके से संचालित करने तक की जानकारी दी गई।
चुनावी रणनीति और जनसंपर्क के गुर बताए
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने महिलाओं को मतदाताओं के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने, चुनावी अभियान की योजना बनाने, क्षेत्रीय मुद्दों की पहचान करने, जनसंपर्क मजबूत करने और चुनाव के दौरान बेहतर प्रबंधन करने के तरीकों से अवगत कराया।
महिलाओं को बताया गया कि राजनीतिक क्षेत्र में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए केवल चुनाव में भाग लेना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए क्षेत्र की समस्याओं को समझना, लोगों से लगातार संवाद बनाए रखना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाना भी जरूरी है।
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय महिलाओं को व्यवस्थित प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन मिलने से उनकी नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास को और मजबूत किया जा सकता है।
महिलाओं की भागीदारी को बताया लोकतंत्र के लिए जरूरी
दिल्ली से आईं चुनाव प्रबंधन एवं अभियान विशेषज्ञ पौसाली ने मझगांव की महिलाओं के साथ संवाद को सकारात्मक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय महिलाएं शांत स्वभाव की होने के बावजूद राजनीति और सामाजिक मुद्दों को लेकर काफी जागरूक और रुचि रखने वाली हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बेहद जरूरी है। जब महिलाएं अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझकर राजनीतिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से आगे आएंगी और चुनावी प्रक्रिया की बारीकियों को समझेंगी, तभी वे प्रभावी नेतृत्व की भूमिका निभा सकेंगी।
“महिलाएं स्वयं निर्णय लेंगी, तभी मजबूत होगा नेतृत्व”
कार्यशाला के आयोजक हरिन तामसोय ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित करना नहीं, बल्कि उन्हें राजनीतिक प्रक्रिया, चुनाव प्रबंधन और जनसंपर्क की व्यावहारिक समझ देना है।
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सक्रिय राजनीति में आगे आकर स्वयं निर्णय लेने की भूमिका में आएंगी, तभी क्षेत्र, जिला और देश के समग्र विकास को नई दिशा मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण एवं संवाद कार्यक्रम व्यापक स्तर पर आयोजित किए जाएंगे।
हरिन तामसोय के अनुसार ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में महिलाएं सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं, लेकिन उन्हें चुनावी रणनीति, अभियान प्रबंधन, मतदाताओं से संवाद और राजनीतिक निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़ा व्यवस्थित प्रशिक्षण कम ही मिल पाता है। ऐसे में इस तरह की कार्यशालाएं उनके लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।
प्रशिक्षण से महिलाओं को मिली नई जानकारी
कार्यशाला में शामिल महिलाओं ने चुनावी राजनीति से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से जानकारी हासिल की और अपने क्षेत्र की समस्याओं तथा अनुभवों को भी साझा किया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए कहा कि उन्हें चुनावी अभियान को व्यवस्थित तरीके से चलाने, लोगों से संपर्क बढ़ाने और अपनी बात मतदाताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के नए तरीके समझने का अवसर मिला।
आयोजकों ने कहा कि लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। महिलाओं को निर्णय लेने, नेतृत्व करने और नीति निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से आने वाले समय में भी प्रशिक्षण, संवाद और नेतृत्व विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यशाला का समापन महिलाओं को राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी निभाने, जनहित के मुद्दों पर काम करने तथा अपने क्षेत्र में जिम्मेदार और प्रभावी नेतृत्व विकसित करने के संकल्प के साथ हुआ।















