चाईबासा:पश्चिमी सिंहभूम जिले में करमा पर्व पारंपरिक रीति-रिवाज, लोकगीत, संगीत और झूमर नृत्य के साथ उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार सपरिवार चाईबासा के वान टोला अखाड़ा, बरकन्दाज टोली एवं पुलहातु अखाड़ा पहुंचे और करमा पूजा समारोह में शामिल हुए।
उपायुक्त ने तीनों अखाड़ों में पारंपरिक विधि-विधान के साथ करम देवता की पूजा-अर्चना की तथा जिलेवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान सदर चाईबासा अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार एवं चाईबासा अंचल अधिकारी उपेंद्र कुमार भी मौजूद रहे। तीनों पूजा स्थलों पर उपायुक्त का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।
पूजा-अनुष्ठान में शामिल होने के बाद उपायुक्त ने उपस्थित श्रद्धालुओं और जिलेवासियों को करमा पर्व की शुभकामनाएं दीं। पूजा स्थलों पर पारंपरिक गीत-संगीत और झूमर नृत्य ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। इस दौरान उपायुक्त मनीष कुमार ने श्रद्धालुओं के साथ सामूहिक झूमर नृत्य में भी हिस्सा लिया, जिससे कार्यक्रम में उत्साह और उमंग और बढ़ गई।
प्रकृति और संस्कृति से जुड़ा है करमा पर्व
इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि करमा पर्व झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति, प्रकृति, कृषि परंपरा और भाई-बहन के पवित्र प्रेम से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। करम देवता की पूजा के माध्यम से प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ-साथ सामुदायिक एकजुटता और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
उन्होंने कहा कि करमा पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे पर्व हमारी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का काम करते हैं।
नई पीढ़ी से संस्कृति से जुड़े रहने की अपील
उपायुक्त ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी से अपनी सांस्कृतिक जड़ों और लोक परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच युवाओं को लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक पर्व-त्योहार और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के महत्व को समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब नई पीढ़ी अपनी संस्कृति को अपनाती है और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाती है, तभी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत निरंतर जीवंत बनी रहती है।
सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश
सदर चाईबासा अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने जिलेवासियों को करमा पूजा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि करमा पर्व सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और सामूहिक सहभागिता का संदेश देता है। इस तरह के सामुदायिक आयोजन लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने के साथ-साथ पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वहीं, चाईबासा अंचल अधिकारी उपेंद्र कुमार ने भी जिलेवासियों को करमा पूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि करमा पर्व प्रकृति और संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। ऐसे पर्व समाज में आपसी सहयोग, सद्भाव और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं।
उन्होंने लोगों से पारंपरिक पर्व-त्योहारों को उत्साह, शांति और आपसी सौहार्द के साथ मनाने की अपील की।
करमा पूजा समारोह में संबंधित अखाड़ों के पदाधिकारी, आयोजन समिति के सदस्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। पारंपरिक पूजा-अर्चना, गीत-संगीत और सामूहिक झूमर नृत्य के बीच करमा पर्व का आयोजन पूरे उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।















