केज कल्चर ने बदली किस्मत: रामसिंह मुन्दुईया की सालाना आय पहुंची 4.5 लाख रुपये

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में मत्स्य विभाग की आधुनिक केज कल्चर योजना ग्रामीणों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है। सदर प्रखंड के छोटा जयपुर गांव निवासी रामसिंह मुन्दुईया ने इस योजना का लाभ लेकर अपनी जिंदगी बदल दी है। कभी सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाले रामसिंह आज आधुनिक मत्स्य पालन के जरिए प्रतिवर्ष 5 से 6 टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं और 3.5 से 4.5 लाख रुपये तक की वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं।

 

मत्स्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रामसिंह को योजना के तहत 2.70 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। इसके साथ ही उन्हें वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज का चयन, संतुलित आहार प्रबंधन, जल गुणवत्ता बनाए रखने और उत्पादन बढ़ाने का प्रशिक्षण भी दिया गया। विभागीय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उन्होंने जलाशय में आधुनिक केज स्थापित कर पंगास और तिलापिया प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया।

 

रामसिंह की सफलता से प्रेरित होकर गांव और आसपास के क्षेत्रों के कई युवा एवं किसान भी आधुनिक मत्स्य पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ने के साथ स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

 

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू कर पात्र लाभुकों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है। उन्होंने युवाओं और किसानों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार अपनाने की अपील की।

 

वहीं जिला मत्स्य पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि आधुनिक केज कल्चर कम समय में बेहतर उत्पादन देने वाली तकनीक है। विभाग इच्छुक मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण, तकनीकी परामर्श और योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।

 

लाभुक रामसिंह मुन्दुईया ने कहा कि पहले परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था, लेकिन विभाग के सहयोग और प्रशिक्षण से आज उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने अन्य ग्रामीणों से भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक मत्स्य पालन अपनाने की अपील की।

AnupSrivastav
Author: AnupSrivastav

State Prabhari, Jharkhand Zee Bharat News

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