सौरभ कुमार, जादूगोड़ा
जादूगोड़ा के सरकारी शिक्षा तंत्र की एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। पोटका प्रखंड स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय +2, जादूगोड़ा को चार वर्ष पहले उच्च माध्यमिक (+2) विद्यालय का दर्जा तो मिल गया, लेकिन आज तक कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए एक भी नियमित विषय शिक्षक की नियुक्ति नहीं हो सकी है। ऐसे में सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य भगवान भरोसे चल रहा है। विद्यालय में पहली कक्षा से लेकर 12वीं तक करीब 700 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि पूरे विद्यालय को संभालने के लिए मात्र नौ शिक्षक हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि 11वीं में 268 और 12वीं में 138 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं, लेकिन उनके लिए विज्ञान, कला और वाणिज्य विषयों के एक भी स्थायी शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। विद्यालय की प्राचार्या रीना कुमारी ने बताया कि वर्ष 2023 में विद्यालय को शिक्षा विभाग द्वारा +2 का दर्जा प्रदान किया गया था। उम्मीद थी कि जल्द ही विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति होगी, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी यह इंतजार खत्म नहीं हुआ। मजबूरी में मध्य विद्यालय और हाई स्कूल के शिक्षक ही अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाते हुए 11वीं और 12वीं की कक्षाएं संचालित कर रहे हैं, जो छात्रों की शैक्षणिक जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि उच्च माध्यमिक स्तर की पढ़ाई के लिए विशेषज्ञ विषय शिक्षकों की आवश्यकता होती है। ऐसे में वर्तमान व्यवस्था केवल औपचारिक शिक्षा तक सीमित रह गई है। यदि शीघ्र नियुक्ति नहीं हुई तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के बोर्ड परीक्षा परिणाम और उनके भविष्य पर पड़ेगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार नई-नई घोषणाएं तो करती है, लेकिन जमीन पर उनकी तैयारी अधूरी रहती है। विद्यालय को +2 का दर्जा देना स्वागत योग्य कदम था, लेकिन बिना शिक्षकों के यह दर्जा केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है। आखिर जब पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं होंगे तो उच्च माध्यमिक शिक्षा का उद्देश्य कैसे पूरा होगा? क्षेत्र के अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधीक्षक से तत्काल 11वीं और 12वीं के लिए विषयवार शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति अथवा नियमित नियुक्ति करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उनका आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे निजी विद्यालयों में पढ़ने में सक्षम नहीं हैं और सरकारी विद्यालय की बदहाल व्यवस्था का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। आज जब सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और डिजिटल इंडिया की बात कर रही है, तब जादूगोड़ा का यह विद्यालय शिक्षा व्यवस्था की हकीकत बयान कर रहा है। यहां बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना तो देखते हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए विषय शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या केवल विद्यालय को +2 का दर्जा दे देना ही शिक्षा सुधार है, या फिर उसके अनुरूप संसाधन और शिक्षक उपलब्ध कराना भी सरकार की जिम्मेदारी है? अब सबकी निगाहें जिला शिक्षा प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि वर्षों से शिक्षकों की कमी झेल रहे इस विद्यालय को आखिर कब पर्याप्त शिक्षक मिलते हैं और कब यहां पढ़ने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों को उनके अधिकार की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नसीब होती है।










