सौरभ कुमार, जादूगोड़ा
बहरागोड़ा चाकुलिया क्षेत्र के ग्रामीण भ्रमण के दौरान समाज सेविका दुखनी सोरेन ने एक ऐसे मेहनतकश परिवार से मुलाकात की, जिसने सीमित संसाधनों के बीच अपने हुनर और मेहनत के बल पर आत्मनिर्भरता की अनोखी मिसाल पेश की है। यह परिवार खेतों में उगने वाली प्राकृतिक घास को मजबूत रस्सी में बदलकर अपनी आजीविका चला रहा है। ग्रामीण परिवेश में पारंपरिक तरीके से किए जा रहे इस कार्य की सबसे खास बात यह रही कि परिवार ने अपने हाथों से एक छोटी मशीन तैयार की है, जिसकी सहायता से रस्सी बनाने का काम किया जाता है।

परिवार के सभी सदस्य मिलकर इस कार्य में जुटे रहते हैं। खेती के साथ-साथ यह कार्य उनके लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन बना हुआ है। दुखनी सोरेन ने परिवार की मेहनत की सराहना करते हुए मीडिया से बातचीत के क्रम में बताया कि गांवों में आज भी ऐसे कई प्रतिभाशाली और मेहनती लोग हैं, जो स्थानीय संसाधनों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उनके श्रम के अनुसार उचित बाजार और सही मूल्य नहीं मिल पाता।

उन्होंने कहा कि वह जल्द ही राज्य सरकार के संबंधित मंत्री एवं उपायुक्त से मुलाकात कर इस पारंपरिक रोजगार और परिवार की समस्याओं से अवगत कराएंगी, ताकि ऐसे कार्यों को प्रोत्साहन मिल सके और ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हो। दुखनी सोरेन ने कहा कि उनका उद्देश्य गांवों की छोटी-छोटी समस्याओं और सिस्टम की कमियों को प्रशासन और उच्च अधिकारियों तक पहुंचाना है, ताकि जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय संसाधनों से जुड़े पारंपरिक हुनर को पहचान, सम्मान और उचित बाजार उपलब्ध कराना समय की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्र में इस परिवार की मेहनत और आत्मनिर्भरता आज अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है।










