सागर जेल से 5 आजीवन कारावास के कैदी रिहा: MP सरकार की विशेष नीति के तहत मिली माफी, अधीक्षक ने दी सीख

रिपोर्ट, मनोज प्रजापति।

गांधी जयंती पर सागर सेंट्रल जेल से 5 आजीवन कारावास के बंदी रिहा, जेल अधीक्षक ने दिलाया अपराध से दूर रहने का संकल्प।

सागर। गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर केंद्रीय जेल सागर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन की जेल विभाग की 27 मई 2025 की रिहाई नीति के अंतर्गत विशेष माफी प्रदान करते हुए आजीवन कारावास से दंडित 5 बंदियों को रिहा किया गया।

कार्यक्रम में जेल अधीक्षक श्री रमेशचंद्र आर्य, जेल के अधिकारी-कर्मचारी और बंदी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, उनके संघर्ष, त्याग और देश के प्रति योगदान को याद किया गया।

महात्मा गांधी के आंदोलनों की दी जानकारी

जेल अधीक्षक श्री रमेशचंद्र आर्य ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा देश की आजादी के लिए अहिंसा के माध्यम से किए गए असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की जानकारी साझा की।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, उनके त्याग और देशसेवा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों पर भी प्रकाश डाला। वहीं, सहायक जेल अधीक्षक श्री सौरभ सिंह चौहान ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी उपस्थित लोगों के साथ साझा की।

रिहा हुए बंदियों से की अपराध से दूर रहने की अपील

गांधी जयंती के अवसर पर आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे 5 बंदियों को विशेष माफी के तहत रिहा किया गया। जेल अधीक्षक श्री रमेशचंद्र आर्य ने रिहा होने वाले बंदियों को भविष्य में दोबारा अपराध नहीं करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि बंदियों ने जेल में रहते हुए जो कौशल एवं प्रशिक्षण हासिल किया है, उसका उपयोग वे अपने परिवार के जीवन-यापन के साथ-साथ समाज के सकारात्मक एवं बेहतर निर्माण में करें।

सामाजिक संगठन ने रिहा हुए बंदियों को दी शुभकामनाएं

इस अवसर पर सामाजिक संगठन रामसरोज समूह, सागर के सदस्यों श्री शैलेष केशरवानी, श्री मोनी केशरवानी एवं अन्य सदस्यों ने जेल से रिहा होने वाले बंदियों को गीतगीता पुस्तक, गंगाजल की बोतल और महाकाल लिखा हुआ मफलर भेंट कर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

समूह की ओर से मानवीय पहल करते हुए बंदी गोकल पिता मोती के परिजन उन्हें लेने जेल नहीं पहुंचे। ऐसे में रामसरोज समूह द्वारा उन्हें उनके निवास तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई।

गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें सकारात्मक जीवन की ओर प्रेरित करने और जेल से बाहर निकलने के बाद बेहतर भविष्य के लिए प्रोत्साहित करने का संदेश देता नजर आया।

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