रिपोर्ट, सुरेंद्र सिंह चौहान।
बाराबंकी के बैना गांव में पसरा मातम, परिजनों की चीख-पुकार से गमगीन हुआ माहौल; जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दी श्रद्धांजलि
बाराबंकी। कुर्सी थाना क्षेत्र के बैना गांव में तीन मासूम बच्चों की मौत के बाद सोमवार को पूरे गांव का माहौल गमगीन रहा। पोस्टमार्टम के बाद जब देवा, सुमित और दिव्यांश के शव गांव पहुंचे तो परिजनों में कोहराम मच गया। अपने जिगर के टुकड़ों को खो चुके परिवारों की चीख-पुकार ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
तीनों बच्चों की अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और संभ्रांत लोग मौजूद रहे। गमगीन माहौल के बीच नम आंखों से मासूमों को अंतिम विदाई दी गई। एक साथ तीन परिवारों के चिराग बुझने से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
शव पहुंचते ही मची चीख-पुकार
सोमवार दोपहर पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद तीनों बच्चों के शव उनके घर पहुंचे। शव देखते ही परिजन बिलख पड़े। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने परिजनों को संभालने का प्रयास किया।
मासूमों की असमय मौत से गांव के लोगों में भी गहरा दुख दिखाई दिया। जिस गांव में बच्चों की चहल-पहल रहती थी, वहां हादसे के बाद मातम पसरा रहा।
अंतिम यात्रा में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़
तीनों बच्चों की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। जनप्रतिनिधियों और क्षेत्र के संभ्रांत लोगों ने भी पहुंचकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाया।
अंतिम विदाई के दौरान हर आंख नम थी। ग्रामीणों के बीच इस दर्दनाक हादसे को लेकर गहरा आक्रोश और दुख भी दिखाई दिया।
निर्माणाधीन परिसर में डूबने से हुई थी मौत
बताया गया कि रविवार शाम गांव के कुछ बच्चे निर्माणाधीन पोल्ट्री फार्म परिसर में पहुंचे थे। यहां खुदाई के बाद बने गहरे गड्ढों में बारिश का पानी भरा था। बच्चे पानी में नहाने लगे, इसी दौरान देवा, सुमित और दिव्यांश गहरे पानी में चले गए।
ग्रामीणों ने दो बच्चों को बाहर निकाला, जबकि तीसरे बच्चे की तलाश में पुलिस और स्थानीय गोताखोर जुटे रहे। काफी प्रयास के बाद उसका शव भी बरामद कर लिया गया।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने निर्माणाधीन परिसर में बने गहरे गड्ढों और वहां सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने निर्माण की अनुमति, गड्ढों की खुदाई और सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है।
वहीं, पुलिस मामले की जांच कर रही है। निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी।
विधायक ने परिवारों से मिलकर दी आर्थिक सहायता
हादसे के बाद क्षेत्रीय विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा ने मृतक बच्चों के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने प्रत्येक परिवार को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी।
तीन मासूमों की मौत से बैना गांव में गम का माहौल है। हादसे ने तीन परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जिसकी भरपाई कर पाना उनके लिए बेहद कठिन है।
बाराबंकी के बैना गांव में पसरा मातम, परिजनों की चीख-पुकार से गमगीन हुआ माहौल; जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दी श्रद्धांजलि
बाराबंकी। कुर्सी थाना क्षेत्र के बैना गांव में तीन मासूम बच्चों की मौत के बाद सोमवार को पूरे गांव का माहौल गमगीन रहा। पोस्टमार्टम के बाद जब देवा, सुमित और दिव्यांश के शव गांव पहुंचे तो परिजनों में कोहराम मच गया। अपने जिगर के टुकड़ों को खो चुके परिवारों की चीख-पुकार ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
तीनों बच्चों की अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और संभ्रांत लोग मौजूद रहे। गमगीन माहौल के बीच नम आंखों से मासूमों को अंतिम विदाई दी गई। एक साथ तीन परिवारों के चिराग बुझने से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
शव पहुंचते ही मची चीख-पुकार
सोमवार दोपहर पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद तीनों बच्चों के शव उनके घर पहुंचे। शव देखते ही परिजन बिलख पड़े। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने परिजनों को संभालने का प्रयास किया।
मासूमों की असमय मौत से गांव के लोगों में भी गहरा दुख दिखाई दिया। जिस गांव में बच्चों की चहल-पहल रहती थी, वहां हादसे के बाद मातम पसरा रहा।
अंतिम यात्रा में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़
तीनों बच्चों की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। जनप्रतिनिधियों और क्षेत्र के संभ्रांत लोगों ने भी पहुंचकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाया।
अंतिम विदाई के दौरान हर आंख नम थी। ग्रामीणों के बीच इस दर्दनाक हादसे को लेकर गहरा आक्रोश और दुख भी दिखाई दिया।
निर्माणाधीन परिसर में डूबने से हुई थी मौत
बताया गया कि रविवार शाम गांव के कुछ बच्चे निर्माणाधीन पोल्ट्री फार्म परिसर में पहुंचे थे। यहां खुदाई के बाद बने गहरे गड्ढों में बारिश का पानी भरा था। बच्चे पानी में नहाने लगे, इसी दौरान देवा, सुमित और दिव्यांश गहरे पानी में चले गए।
ग्रामीणों ने दो बच्चों को बाहर निकाला, जबकि तीसरे बच्चे की तलाश में पुलिस और स्थानीय गोताखोर जुटे रहे। काफी प्रयास के बाद उसका शव भी बरामद कर लिया गया।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने निर्माणाधीन परिसर में बने गहरे गड्ढों और वहां सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने निर्माण की अनुमति, गड्ढों की खुदाई और सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है।
वहीं, पुलिस मामले की जांच कर रही है। निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी।
विधायक ने परिवारों से मिलकर दी आर्थिक सहायता
हादसे के बाद क्षेत्रीय विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा ने मृतक बच्चों के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने प्रत्येक परिवार को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी।
तीन मासूमों की मौत से बैना गांव में गम का माहौल है। हादसे ने तीन परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जिसकी भरपाई कर पाना उनके लिए बेहद कठिन है।
















