चाईबासा, 24 अक्टूबर। पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार को प्रोजेक्ट जागृति – बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम के तहत जिले के छह स्वास्थ्य केंद्रों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में प्रशासनिक पदाधिकारियों और अभियंताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया तथा स्वयं रक्तदान कर आम नागरिकों को भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार की मौजूदगी में सहायक समाहर्ता हीरा जोरवाल ने अनुमंडल अस्पताल, चक्रधरपुर में रक्तदान किया। वहीं, सदर अस्पताल चाईबासा स्थित कुपोषण उपचार केंद्र में गोपनीय प्रभारी कुमार हर्ष, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्वेता भारती और ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता राजू मरांडी ने रक्तदान कर सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत किया। इसके अलावा खूंटपानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित शिविर में प्रखंड विकास पदाधिकारी धनंजय पाठक ने भी स्वैच्छिक रक्तदान किया।
उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने रक्तदान करने वाले पदाधिकारियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि रक्तदान मानवता की सेवा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। दुर्घटना, गंभीर बीमारी, आपातकालीन स्थिति और शल्य चिकित्सा के दौरान मरीजों को रक्त की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे समय में स्वैच्छिक रक्तदान जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने स्वस्थ एवं चिकित्सकीय रूप से पात्र नागरिकों से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की।
सहायक समाहर्ता हीरा जोरवाल ने भी रक्तदान को मानवता के प्रति जिम्मेदारी बताते हुए लोगों से इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुसार रक्तदान करना सुरक्षित प्रक्रिया है। रक्त की एक यूनिट किसी जरूरतमंद मरीज के लिए जीवन बचाने की उम्मीद बन सकती है। इसलिए लोगों को चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित पात्रता के अनुसार स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना अभियान का उद्देश्य
प्रोजेक्ट जागृति के तहत आयोजित इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य जिले में स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करना, जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहयोग देना और आम लोगों के बीच रक्तदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना है। प्रशासनिक अधिकारियों और अभियंताओं की भागीदारी से यह संदेश दिया गया कि रक्तदान केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।
शिविरों में रक्तदान से पहले दाताओं की स्वास्थ्य जांच और पात्रता का आकलन किया जाता है। इसके बाद प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा स्वच्छ एवं स्टेराइल, एक बार उपयोग होने वाली सामग्री की मदद से रक्त संग्रह किया जाता है।
प्रोजेक्ट जागृति के माध्यम से जिला प्रशासन ने लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया कि स्वैच्छिक रक्तदान जरूरतमंदों की मदद करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। अधिक से अधिक पात्र नागरिकों की भागीदारी से रक्त की उपलब्धता बेहतर बनाने और जरूरत के समय मरीजों को सहायता पहुंचाने में मदद मिल सकती है।















