रिपोर्ट,सुरेश चंद्रा।
मऊ, 22 सितंबर। भा.कृ.अनु.प.–राष्ट्रीय बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, मऊ में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद, लखनऊ द्वारा प्रायोजित “उत्तर प्रदेश में सतत कृषि के लिए जलवायु-लचीली बीज प्रणालियाँ” विषयक 10 दिवसीय ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
डॉ. परमेंद्र सिंह की उपस्थिति में हुआ उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन 22 सितंबर को उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक डॉ. परमेंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता भा.कृ.अनु.प.–राष्ट्रीय बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, मऊ के निदेशक डॉ. ए. आनंदन ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद वंदे मातरम्, भा.कृ.अनु.प. गीत एवं उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद गीत प्रस्तुत किए गए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्यों से कराया गया परिचय
डॉ. अंजनी सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं पाठ्यक्रम सह-निदेशक, ने सभी प्रतिनिधियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। वहीं, डॉ. कल्याणराव, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं पाठ्यक्रम निदेशक, ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्यों एवं पाठ्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी दी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के बीज प्रौद्योगिकी प्रभागों तथा कृषि विभागों से जुड़े वैज्ञानिक, सहायक एवं एसोसिएट प्रोफेसर तथा शोधार्थी हिस्सा ले रहे हैं।
किसानों की मूलभूत आवश्यकता है बीज: डॉ. परमेंद्र सिंह
उद्घाटन संबोधन में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक डॉ. परमेंद्र सिंह ने कहा कि बीज किसानों की मूलभूत आवश्यकता और राज्य तथा देश की कृषि की आधारशिला है। उन्होंने दलहनी फसलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के सूखा-प्रवण बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए तनाव-सहिष्णु एवं प्रतिरोधी किस्मों के विकास पर अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जैव-सुदृढ़ीकृत किस्मों के विकास की दिशा में भी शोधकर्ताओं से कार्य करने का आह्वान किया।
ब्रीडर बीज उत्पादन एक लाख क्विंटल से अधिक: डॉ. ए. आनंदन
संस्थान के निदेशक डॉ. ए. आनंदन ने बीज फसलों पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की स्थापना और उसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक हस्तक्षेपों और अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के निरंतर प्रयासों से ब्रीडर बीज उत्पादन अब एक लाख क्विंटल से अधिक हो गया है।
उन्होंने विशेष रूप से खुले परागित किस्मों में बीज प्रतिस्थापन दर बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वर्तमान में इन किस्मों में बीज प्रतिस्थापन दर लगभग 15 से 30 प्रतिशत बताई गई। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रमुख परिणाम के रूप में जलवायु-लचीली बीज प्रणाली के विकास की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।
वैज्ञानिकों और शोधार्थियों की रही सहभागिता
उद्घाटन कार्यक्रम में भा.कृ.अनु.प.–राष्ट्रीय बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, मऊ के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पवित्रा वी. ने किया, जबकि डॉ. कल्याणी कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
















