रिपोर्ट, पीएन सिंह।
बेलहरा। कस्बे के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर तथा फतेहपुर स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं महावीर चैत्यालय में शुक्रवार को दसलक्षण धर्म के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने भगवान का जलाभिषेक, पूजन-अर्चन एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान कर धर्मलाभ लिया।
दसलक्षण धर्म के तीसरे दिन भगवान श्रीजी का विधि-विधानपूर्वक जलाभिषेक कराया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने दसलक्षण धर्म की पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसरों में भगवान पार्श्वनाथ एवं भगवान चंद्रप्रभु की चालीसा, आरती सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। भक्ति और धार्मिक आयोजनों से वातावरण दिनभर भक्तिमय बना रहा।
मन, वचन और कर्म में एकरूपता ही आर्जव धर्म का मूल भाव
प्रवचन के दौरान ब्रह्मचारिणी पूजा दीदी ने उत्तम आर्जव धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन से छल-कपट का त्याग कर सरल और सहज स्वभाव अपनाना चाहिए। मन, वचन और कर्म में एकरूपता ही आर्जव धर्म का मूल भाव है।
उन्होंने कहा कि छल-कपट से अर्जित किया गया वैभव कुछ समय के लिए सुखद प्रतीत हो सकता है, लेकिन आगे चलकर वही अनेक कष्टों का कारण बन सकता है। छल-कपट करने वाला व्यक्ति वास्तविक आत्मिक सुख प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सरल स्वभाव अपनाकर सत्य, सहजता और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए। इसी में मनुष्य का वास्तविक कल्याण निहित है।
धार्मिक प्रश्न मंच और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्साह से शामिल हुए श्रद्धालु
धार्मिक आयोजनों के साथ जैन यूनिटी ग्रुप की ओर से धार्मिक प्रश्न मंच एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को जैन समाज की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
इस दौरान जैन समाज के पदाधिकारी, महिलाएं, बच्चे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां चलती रहीं।
















