पारसनाथ के जंगल में बड़ी बरामदगी: 5 किलो का केन बम और 38 अर्धनिर्मित ग्रेनेड शेल जब्त, पुलिस-CRPF का संयुक्त अभियान
गिरिडीह, झारखंड। पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान गिरिडीह पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा बलों ने जिरवाबेडा जंगल में तलाशी अभियान चलाकर एक केन बम समेत भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और ग्रेनेड निर्माण में इस्तेमाल होने वाली संदिग्ध सामग्री बरामद की है। पुलिस को आशंका है कि इन सामग्रियों को किसी बड़ी विध्वंसक वारदात को अंजाम देने के उद्देश्य से छिपाकर रखा गया था।
गुप्त सूचना के आधार पर चला सर्च ऑपरेशन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 की रात गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार और CRPF की 154वीं बटालियन के कमांडेंट सुनील दत्त त्रिपाठी को पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र के जिरवाबेडा
जंगल में विस्फोटक सामग्री छिपाए जाने की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के सत्यापन के बाद जिला पुलिस और CRPF की संयुक्त टीम ने इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया।
तलाशी में क्या-क्या मिला?
सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने निम्नलिखित सामग्री बरामद की:
- लगभग 5 किलोग्राम वजन का एक केन बम।
- करीब 35 मीटर कॉर्डेक्स वायर।
- इलेक्ट्रिक वायर का एक बंडल।
- लोहे के 38 अर्धनिर्मित ग्रेनेड शेल।
- एक इमरजेंसी लाइट।
- अन्य संदिग्ध सामग्री।
बरामदगी के बाद सुरक्षा की दृष्टि से इलाके में सतर्कता बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है।
वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में चला अभियान
इस संयुक्त अभियान का नेतृत्व अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) सुरजीत कुमार और CRPF की 154वीं बटालियन के द्वितीय कमान पदाधिकारी अभिनव आनंद ने किया। अभियान में जिला पुलिस बल, CRPF की क्विक एक्शन टीम (QAT), खुखरा थाना प्रभारी रविंद्र कुमार सिंह तथा मधुबन थाना के पुलिस पदाधिकारियों के शामिल होने की जानकारी भी प्रकाशित रिपोर्टों में दी गई है।
बरामद सामग्री के स्रोत का पता लगाने में जुटी पुलिस
पुलिस के अनुसार, गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई से संभावित विध्वंसक गतिविधियों को रोकने में मदद मिली है। अब जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विस्फोटक सामग्री जंगल में किसने छिपाई थी, इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है। बरामदगी को नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।















