जालौन: जनपद जालौन के विकास खंड कुठौंदा बुजुर्ग में विकास कार्यों और सरकारी धन के उपयोग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ही गांव के खेल मैदान को लेकर अलग-अलग कार्यालयों से जारी आख्याओं में भारी विरोधाभास सामने आया है, जिससे शासकीय धन के गबन और फर्जी वित्तीय आहरण की आशंका गहरी हो गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता गजेन्द्र सिंह सेंगर द्वारा ग्राम पंचायत कुठौंदा बुजुर्ग में खेल मैदान निर्माण, तार फेंसिंग व अन्य विकास कार्यों में अनियमितता को लेकर आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इस मामले में अधिकारियों द्वारा दी गई रिपोर्टों ने पूरे खेल की पोल खोल दी है:
जिला पंचायत राज अधिकारी का पत्रांक 3915, दिनांक 08.08.2026): इस आधिकारिक पत्र में पंचायत सचिव के हवाले से यह लिखित रूप से स्वीकार किया गया है कि “ग्राम पंचायत कुठौंदा बुजुर्ग में कोई खेल मैदान है ही नहीं”।
विकास खंड कार्यालय के पत्र (पत्रांक 1573 व पत्रांक 705): इसके ठीक विपरीत, ब्लॉक स्तर से जारी पत्रों में यह दावा किया गया है कि 5वें राज्य वित्त आयोग के तहत खेल मैदान के समतलीकरण, मिट्टी भराई, चैन लिंक जाली और एंगल लगाने के कार्य पर ₹39,839 की धनराशि व्यय की गई है और कार्य मौके पर मौजूद है।
गंभीर सवाल और जनता की मांग:
स्थानीय नागरिकों और प्रार्थी का कहना है कि जब जिला पंचायत राज अधिकारी के पत्र के अनुसार गांव में खेल मैदान का कोई अस्तित्व ही नहीं है, तो फिर ब्लॉक स्तर के पत्रों में उसी गैर-मौजूद मैदान के नाम पर ₹39,839 की सरकारी रकम खर्च करने का दावा कैसे किया जा रहा है?
एक ही विकास कार्य पर जनपद और विकास खंड स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इतने परस्पर विरोधी और झूठे जवाब देना सीधे तौर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार, शासकीय धन के दुरुपयोग और लीपापोती को प्रमाणित करता है। गजेन्द्र सिंह सेंगर ने शासन-प्रशासन के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण में पत्रांक 3915, 1573 व 705 की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि खेल मैदान के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।















