बाराबंकी: बच्चों को बचाने की जंग में खुद झुलसी मां, आग के तांडव में दो किसानों का सब कुछ खाक

सुरेंद्र सिंह चौहान जी भारत न्यूज़।

बाराबंकी (यूपी) | 24 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। घुंघटेर थाना क्षेत्र के जानीनगर गांव में शुक्रवार को अचानक छप्पर में लगी भीषण आग ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस अग्निकांड में जहां एक मां ने अपनी जान दांव पर लगाकर अपने तीन मासूम बच्चों को सुरक्षित बचा लिया, वहीं आग की चपेट में आने से दो किसानों का लाखों का सामान जलकर राख हो गया।
ममता की जीत: मौत के मुंह से खींच लाई बच्चों को
जानकारी के मुताबिक, जानीनगर निवासी मुलायम की पत्नी नीशू यादव शुक्रवार दोपहर अपने तीन बच्चों को घर पर छोड़कर पड़ोस में किसी काम से गई थीं। इसी दौरान अज्ञात कारणों से उनके छप्पर में आग लग गई। आग ने चंद मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया और बच्चे घर के भीतर ही फंस गए।
बच्चों की चीख-पुकार सुनकर मां नीशू यादव मौके पर पहुंचीं। बिना अपनी जान की परवाह किए वह आग की लपटों के बीच कूद गईं और तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लाईं। हालांकि, इस साहसी प्रयास में नीशू खुद बुरी तरह झुलस गईं। उन्हें गंभीर हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ रेफर कर दिया है।
तबाही का मंजर: राख में तब्दील हुई जीवन भर की कमाई
आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उन्होंने पड़ोसी अजय पुत्र हरिद्वारी के मढ़हे को भी अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक सब कुछ नष्ट हो चुका था।
मुलायम का नुकसान: घर में रखी नगदी, जेवर, बर्तन, कपड़े, अनाज (गेहूं), पुआल और एक मोटरसाइकिल जलकर राख हो गई।
अजय का नुकसान: आग में उनका ट्रैक्टर, चारा मशीन और भारी मात्रा में रखा भूसा व गेहूं जल गया।
प्रशासन और दमकल विभाग के प्रति नाराजगी
इस हादसे ने प्रशासन की मुस्तैदी पर भी सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद दमकल की गाड़ी काफी देरी से पहुंची। तब तक ग्रामीणों ने खुद ही आग बुझा ली थी। क्षेत्रीय लेखपाल मोहित यादव ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन किया है और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया है।
पीड़ित परिवारों ने अब सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है ताकि वे दोबारा अपना जीवन शुरू कर सकें।

2 thoughts on “बाराबंकी: बच्चों को बचाने की जंग में खुद झुलसी मां, आग के तांडव में दो किसानों का सब कुछ खाक”

  1. मुलताई में कुछ बैंक, कुछ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बिना पार्किंग के संचालित हो रहे हैं, तथा कुछ लोगों ने पार्किंग के लिए जगह बहुत कम दी है। जो वाहन पार्किंग के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे ग्राहको को वाहन खड़े करने में बहुत परेशानी होती है। आखिर बिना पार्किंग के बैंक कैसे संचालित हो रहे हैं। ये तो नियमों का उल्लघंन हो रहा है। सड़क किनारे वाहन खड़े करने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। कई बार दुर्घटना तक हो जाती है। सरकारी जमीन पर वाहन खड़े हो रहे हैं । जबकि जिस भवन मे बैंक संचालित होती है उसकी स्वयं की पार्किंग होना जरूरी है। मुलताई में संचालित सभी बैंकों की पार्किंग व्यवस्था की जांच होना चाहिए।
    कुछ बेसमेंट बिना अनुमति के बने हैं। कुछ व्यावसायिक भवनों के नक्शे बिना पार्किंग दिए पास हुए हैं। कुछ लोगों ने सरकारी जमीन पर पक्का अतिक्रमण कर लिया है। जांच होना चाहिए।
    नाम – रवि खवसे
    शहर – मुलताई
    जिला – बैतूल
    राज्य – मध्यप्रदेश

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